[19/09, 06:20] Saudamini Khare: सभी साहित्य समागम के सम्मानीय साथियों को मेरा ह्रदय से नमन 🙏सुप्रभात आज की उपस्थिति मेरी इस रचना के साथ
*तेरा प्रेम महकता उपवन*
(1)तेरा प्रेम महकता उपवन।
जिसे देख झूमें है तन मन।।
प्रेम मे तेरे भींगा है मन मन।
तेरा प्रेम महकता उपवन।।
(2)तेरा मिलना जैसे हो भोर।
तेरा जाना ढल ती हो शाम।।
तेरा प्रेम महकता उपवन।
तुझे देख झूमे है तन मन।।
(3)तेरा साथ है मेरी शान।
जैसे कोई उन्मुक्त गान।।
तेरा प्रेम महकता उपवन।
तुझे देख झूमेंहै तन मन।।
(4)तेरी आवाज उत्कंठ राग।
तेरा यादे हर बक्त सांथ।।
तेरा प्रेम महकता उपवन ।
तुझे देख झूमे है तन तन।।
(5)तेरे विन हर दिन तमाम ।
जैसे हो कोई जलती शाम।।
तेरा प्रेम महकता उपवन।
उसे देख झूमे है तन मन।
(6)तू जीवन मे शीतल बयार ।
जैसे कोई केशर क्यार।।
तेरा प्रेम महकता उपवन।
उसे देख झूमे है तन मन ।।
(7)तू जीवन की बसंत बहार।
जैसे कोई राग मल्हार।।
तेरा प्रेम महकता उपवन।
उसे देख झूमे है तन मन ।।
सौदामिनी खरे रायसेन म0प्र0 दामिनी 🙏✍🏻
*तेरा प्रेम महकता उपवन*
(1)तेरा प्रेम महकता उपवन।
जिसे देख झूमें है तन मन।।
प्रेम मे तेरे भींगा है मन मन।
तेरा प्रेम महकता उपवन।।
(2)तेरा मिलना जैसे हो भोर।
तेरा जाना ढल ती हो शाम।।
तेरा प्रेम महकता उपवन।
तुझे देख झूमे है तन मन।।
(3)तेरा साथ है मेरी शान।
जैसे कोई उन्मुक्त गान।।
तेरा प्रेम महकता उपवन।
तुझे देख झूमेंहै तन मन।।
(4)तेरी आवाज उत्कंठ राग।
तेरा यादे हर बक्त सांथ।।
तेरा प्रेम महकता उपवन ।
तुझे देख झूमे है तन तन।।
(5)तेरे विन हर दिन तमाम ।
जैसे हो कोई जलती शाम।।
तेरा प्रेम महकता उपवन।
उसे देख झूमे है तन मन।
(6)तू जीवन मे शीतल बयार ।
जैसे कोई केशर क्यार।।
तेरा प्रेम महकता उपवन।
उसे देख झूमे है तन मन ।।
(7)तू जीवन की बसंत बहार।
जैसे कोई राग मल्हार।।
तेरा प्रेम महकता उपवन।
उसे देख झूमे है तन मन ।।
सौदामिनी खरे रायसेन म0प्र0 दामिनी 🙏✍🏻
