Thursday, May 31, 2018

यशोदा के आँगन की भोर

एक हाथ माखन दूजे मुरलिया,
यशोदा के लाला की बाजे पयलिया,
एक-एक पग ठुमक-ठुमक
चालें कन्हैया,
यशोदा के लाला की बाजे पयलिया,
आगेआगे कान्हा पीछे पीछे
मैया

तन्हाईयों के काले नाग

तन्हाईयों के काले नाग,        मुझे डस रहे हैं,
तेरी एक झलक पाने को,       हम तरस रहे हैं,
गर्म हवाओं के झोंके,            मुझसे ही चल रहें है,
ठंडी फुहार देजा ,                कि हम जल रहे हैं,
मुझसे दूर रह कर,                मेरे दिल मे   रह रहे हो,
दिल मे रहने वाले ,             अब कहाँ जा रहा हो,
मोहब्बत का डिपोजिट,           तेरे नाम कर रहे हैं ,
मोहब्बत का अकाउंट ,        अब बंद कर रहे है,
तुझसे मोहब्बत करके,         सूली पे चढ गये हैं,
सारे जमाने को ,                 अब अलविदा कह रहे है,
तुझसे न मिले पाने का गम,    संग ले जा रहे हैं,
मिलोगे अगले जन्म में,         यह दुआ मना रहे है ,

Wednesday, May 30, 2018

मेरी सहेली

तू हूरिस्तान की हूर हैं,
तू किसी नजर का नूर है
नूरुन्निशा कहूँ  तुझे,
तू मेरी नज़र का नूर है,
स्नेह और प्रेम भरपूर है,
हर बुराई से दूर है ,
कुछ कर गुजरने का सुदूर है,
पर मंजिल अभी दूर है,
कभी संध्या सी नीरवता,
कभी उषा सी चंचलता,
दामिनी की सहेली है,
पर एक अंजान पहेली है,




🙏🙏🙏

पूर्णिमा की चाँदनी

कूलन मे फूलन मे मेरे गाँव के आँगन मे छुटक रही पूनम की चाँदनी
चाँदी सी धवल विमल दूध सी चाँदनी,तारों की झिलमिल सीओढे चुनरिया,चंद्रमा  के  दर्पण मे रूप  निहारती,




🙏🙏🙏

Tuesday, May 29, 2018

ग्यान का सागर



दरिया का किनारा


सुप्रभात


लहरें

साहिल  दरिया का मालिक है,
लहरे दरिया की गुलाम,
आना जाना हैं उनकी नियती तमाम,
लिखा भाग्य का कम नही  होता सभी भाग्य को करे सलाम,

  • अपनी जगह पर है सोहित ,चले एक दूजे विन काम,

लहरों का दर्द

छू कर ही तो छू जाती हैं,
अहसासों  से ही अहसास  जगाती है,
उमंगें  लेकर  आती हैं ,
बोझिल हो कर जाती है,
घायल करने वाली ,
घायल होकर जाती हैं,
कोई  न जान सका,
उन लहरों कादर्द भला,
घायल भी वही ,मुजरिम भी वही,
आना और जाना है उनको,
चैन का एक पल नहीं,
ठहर दो घड़ी कही सुकून  पाये,
ऐसा कोई  साहिल  नहीं,




🙏🙏🙏

पंछियों का कलरव


बिजुरिया


मैं भी रोई


मैं न सोई रात भर


शुभरात्री


राम नाम की चाकरी

राम नाम की चाकरी,लगी रहे दिन रात,
छोटो को आशीष मेरा,बडो़ को सादर सुप्रभात। 

Wednesday, May 23, 2018

महारास

चांद से चांदनी ,चांदनी से चांद है,
चांद बादलो मे अटखेलि करता रहा,
चांदनी ने ओढी तारों की चुनर,
चांदनी बन गई चांद की अनुगामिनी ,
 वो  लहरा के आंचल चलती रही,
सारे समा को ये नजारा लुभाता रहा,
देख सुहाना समय आ गए सावरे,
तान वंशी की यू वो  सुनाने लगे,
सुन वंशी की धुन सखी आ गईं,
कान्हा राधे ही राधे बुलाने लगे,
राधा आने की खुशी में झूमा सारा समा,
खग वृंद मधुवन महकने लगे,
देखते देखते भावों की सरिता वही
हर तरफ कृष्ण राधे राधे हुए,                              
 देखमहरास को दामिनी ठगी रह गई,
खुली आंखो मे झांकी सजाने लगी,
भक्ति के रस पगी राधिका,
राधे रानी की पीर सुहानी लगी,



जीने की चाह


Goodmorning


Friday, May 18, 2018

मेरा वंदन


सुप्रभात

भोर की लाली फैल गयी है,
उषासुंदरी महक रहीहै,
रवि के हस्ताक्षर से,
गुडमार्निंग शुरुहुई है
सादर सुप्रभात मित्रों,
 "दामिनी"🙏🙏🙏

सच्चा सुरूर


Thursday, May 17, 2018

गोकुल का भुनसारा

उठ भुनसारे जगावे तोरी  मैया,                                            
भोर भयो सूरज चढ आयो,लल्ला खोलो किवरियां,
नंदबाबा का प्यारो लाला माखन मिश्री को खवैया ,
उठ भुनसारे जगावे तोरी मैया,
ग्वाल वाल सब द्वारे ठाड़े, संग मे दाऊ भैया,
उठ भुनसारे जगावे उनकी मैया
गैया वछड़ा बंधे रम्हा रय, संग सुरै गैया,
उठ भुनसारे जगावे तोरी मैया
वंशी की धुन हमें सुनाजा, लेजा ताजा दहिया,
उठ भुनसारे जगावे तोरी मैया
सुमिर सुमिर तेरो यश गाऊं, पार लगादै नैया
उठ भुनसारे जगावे तोरी मैया
सादर सुप्रभात मित्रो 🙏
    "  दामिनी"🙏

शुभ रात्री

रात ज्यों गहराने लगी,                  मां यशोदा लोरी सुनाने लगी,     लोरी सरगम की तान सुन,           जग के सुलैया भी आज सोने लगे,  गुडनीइट कहने का समय हो    गया,
शुभरात्री🙏

आत्मविभोर

सुवह सुहानी भोर मे मै होकर आत्म विभोर
वंदन करूं मै उस रव का जिसने सबकी पकड़ी पौर
जिसकी महिमा का  ओर छोर
नही है ओर न छोर नही  है उस पर जोर
 वंदन  नमन  अभिनंदन का पर उसका है दौर
साथियो उसका ही है  दौर

       नमस्कार साथियों

पत्थर के सनम्

दिल तेरा पत्थर है, या तुझे कहूं पत्थर के सनम,
दिल मे रहने वाले, क्यो बने पत्थर के सनम,
दिल बड़ा ही नाजुक है,मत बनो पत्थर के सनम
टूटे दिल को कैसे जोडोगे, ये मेरे पत्थर के सनम,
मेरे चाहत मे दम होगा,तो बोल उठेगे पत्थर के सनम,
तब्दीली दुनिया का उसूल , मत वनो पत्थर के सनम ,
जग मे पूजे जाते है, अगर पत्थर के सनम,
 इबादत करने वाले, बदल देते है पत्थर के
 स्वरचित कविता "दामिनी"

फूलों से दोस्ती

काटो की चुभन से प्यार हो गया जबसेकी फूलो से दोस्ती मैने,खुश्बू के आसयाने से कीचड़ समेट के फेक दी मेने जबसे की फूलो से दोस्ती मेने,आँसू की धारा ने समंदर छू लिया हर बूँद गंगा की सहेज ली मैने जबसे की फूलो से दोस्ती मैने काँटों की चुभन से प्यार होगया, हर तरफ़ महका चमन इश्क़ियाअंदाजमे सावरे की वासुरी का आगाज हो,
जबसे की फूलों दोस्ती मैने

भजन

अब तो लेलो खबरिया, राधा के सवरिया,
रो-रो नैना सूख गये हैं, तुझसे मिलने सवरिया,
अब तो लेलो खबरिया, राधा के सवरिया,
तेरी ये सूरत मन को भाये, उसे देखने मन हरसाये,
सूझे न कोई डगरिया, राधा के सवरिया,
जबसे मथुरा जाय बसे हो, कंस  की नगरी आन बसेहो,
फेरी काहे नजरिया,राधा के सवरिया,
नैया मेरी मझदार पड़ी है,देखो कैसी कठिन घड़ी है,
करदो भव पार सवरिया, राधा के सवरिया,

Wednesday, May 16, 2018

चांद का सफर आधा हुआ,
रात ढलती रही,                                           चांदनी महकती रही ,                                   निंदिया छम सेआकर सुलाने लगी ।
शुभ रात्री🙏दामिनी
,जब घोर निराशा आती है ।
 मन मे उदासी छाती है ।
 तब आशा की एक किरण,
 जीवन ज्योति जगाती है ।
 अमृत बूंद की यह हाला,
     नव जीवन दे जाती है।
.....





,जब घोर निराशा आती है ।
 मन मे उदासी छाती है ।
 तब आशा की एक किरण,
 जीवन ज्योति जगाती है ।
 अमृत बूंद की यह हाला,
     नव जीवन दे जाती है
    दामिनी


जन्म दिन आए बारम्बार,जन्म दिन आए बारम्बार,
जन्म दिन आए बारम्बार, जन्म दिन आए बारम्बार,
जन्म दिन आए बारम्बार,जन्म दिन आए बारम्बार,
सुखशांति की लिए गाघरी ,झलके बारम्बार
इस शुभ दिन पर करे कामना,सुखी रहे परिवार
जन्म दिन आए बारम्बार, जन्म दिन आए बारम्बार,
            दामिनी
तुझसे मिलने की वेकरारी हरदम रहती है,
दिल वेचैन और आंखे नम रहती है,                     जब जब भी तू मिला एक कविता जन्म लेती है,
सिसकती हुई कविता तेरी कहानी कहती है,
तुझसे मिलने की वेकरारी हरदम रहती है
तेरी यादो की लय और वादो के बंधन मे बंधी होती है
बस इस प्रेम मे कविता सुवकती रहती है,
तुझसे मिलने की वेकरारी हरदम रहती है
दुखो के पन्नो पे आहो भरी कहानी होती है,
आंसुओ की स्याही से कविता दमकती रहती है,
तुझसे मिलने की वेकरारी हरदम रहती है
मन के सागर मे यादो की लहर उठती है,
कोई हीरा मिल जाए आंखे तरसती रहती है
तुझसे मिलने की वेकरारी हरदम रहती है
जन्म लेते दोनो एक जगह पर,
एक मन मोह लेता ,
एक खटकता आंख मे,
जन्म लेते दोनो एक जगह पर,
एक कोमल को अस्तित्व देता,
एक चुभता पांव मे,
जन्म लेते दोनो एक जगह पर,
एक को छूने डरें,
एक को हर कोई छुए,
जन्म लेते दोनो एक जगह पर,
एक को फूल कहते है ,
जो काम आए नाम के,
जन्म लेते दोनो एक जगह पर,
एक को शूल कहते ,
जो आए केवल काममे,
जन्म लेते दोनो एक जगह पर,
शूलआते है सुरक्षा के लिये,
फूल समर्पण क़े लिये,
जन्म लेते दोनो एक जगह पर,
फूल बनो करना समर्पण संसार मे,
शूल बन करना सुरक्षा आवाम मे
                "दांमिनी",
मां शब्द नहीं एक एहसास है,                                                जो दूर रह कर भी पास है,
यूं तो जमाने मे हर कोई पास है,
पर वो सबसे प्यारा एहसास है,
मां  शब्द नही एक एहसास है,
विना शर्त करती अरदास है,
मां एक अमिट मधुमास है,
मां शब्द नही एक एहसास है,
मां तेरे जीवन का पहला गुरु है,
उसके सबक से जीवन शुरु है,
मां के विना जीवन वेहाल है,
मां शब्द नही एक एहसास है,
   मदर्स डे पर समस्त प्ररेणामयी मातृशक्ति के लिए सादर समर्पितस "दामिनी" 
तुम वहारों के झोकों की तरह आए,
और एक खुशी की लहर दौड़ा कर चले गए,
तुम शीतल हवा हो,या प्रश्नो के साये,
यातुम कोई गीत होतुम,जिसे कोई हरवार गुनगुनाये, तुम वहारों के झोकों की तरह आए,
फूलो सी सुगं हो तुम,हर तितली मंडराये,
चंदन बन गए हो तुम,कोई नागिन न लिपट जाए,
तुम वहारों के झोकों की तरह आए,
बड़े कठिन जीवन के पथ है,कोई पथ भटक न जाए,
फिसलन भरे है रस्ते,पैर फिसल न जाए
तुम वहारों के झोकों की तरह आए,
तुम्हारी मीठी बातों पर कोई न मर जाए,
प्रेम जैसी पहेली से कहीं साक्षात्कार न हो जाए,
तुम वहारों के झोकों की तरह आए,
जीवन खुशियों से भर जाए,हर खुशी सौ खुशी लाए,
मुझको दुआ देने वाले,मेरी दुआ तुझे लग जाए,
तुम वहारों के झोकों की तरह आए,
जब आसमा पर चांद देखू मेरी सूरत नजर आए,
जब तलक देखू तुझे,जब तलक तू नजर आए,
तुम वहारों के झोकों की तरह आए, और------
                 "दामिनी"  
पल पल करते बक्त गुजर जायेगा ,
कल कल करते इन्सान रहजायेगा,
कल की जगह आज ही खुश होलो न जाने कल कब आयेगा👏🍀🌼
आज को कल मे बदलना है,
कल को आज मे बदलना है
आज कल ,कल आज के,
बीच हमे चलना है।👏🍀🌻
कभी कल की तैयारी,
कभी आज की तैयारी,
ये रोज की तैयारी मे,
खुशियो ट्रेन न छूट जाये,व
करले जल्द सवारी👏🍀🌻
खिल खिला कर टिकिट कटाले,
गमो और चिन्ता की छोड़ पोटली,
अब आ गया 2018,
खुश रह कर जीने का,
प्रण तू करले टोट्ली👏🍀🌻

नवीन रचना स्वरचित-दामिनी😁

सुप्रभात

सुबह सुहानी भोर हुई,                         सूरज की ड्यूटी शुरु हुई,
राम राम की वेला में,                         अपनी  गुडमार्निंग शुरु   हुई,
        सादर सुप्रभात🙏

सुप्रभात

सुबह सुहानी भोर हुई,  
 सूरज की ड्यूटी शुरु हुई,
राम राम की वेला में,  
  अपनी  गुडमार्निंग शुरु हुई,
        सादर सुप्रभात🙏