Sunday, October 7, 2018

सबैया

जिन मोर मुकुट पीताम्बर धारो।
सावली सूरत सोह रही है।
कानन कुण्डल गले माल बैजंती।
चंचल चितवन मन मोह रहीहै।
सुन्दर रूप वसो निज नैनन।
मीरा दीवानी होय रही है।
गोविन्द गोविंद गायके नाचे।
मीरा मस्त मगन मन झूम रही है।
ऐसी भक्ति देख भगति खुश होवे।
हरकि हरकि जस गाय रही है।

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