Wednesday, June 6, 2018

मेरा हुस्न

मेरा हुस्न वनाम परछाई रे,
फिजा मुझसे ही छाई रे,
फूलों का गजरा सजाया,
अम्बर ने चुनर ओढाई रे,
मेरा हुस्न बना बजाई रे,
काली घटाओ से कजरा चुराया,
चाँद ने विन्दिया पहनाई रे,
मेरा हुस्न बना हरजाई रे,
सोना रूप हृदय में समाया,
ये सोच सोच मुस्काई रे,
मेरा हुस्न बना हरजाई रे ,
चलती हवाओं ने घूंघट उठाया,
सारी कायनात सरमाई रे ,
मेरा हुस्न बनाने हरजाई रे,
सारे जग मे तू है  समाया,
प्रेम का सागर में समय,
एक मैं ही तुझसे पराई रे,
मेरा हुस्न बना हरजाई रे,

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