Thursday, June 14, 2018

श्वेत वस्त्र धारणी पदमाशनी माँ शारदे
ज्ञान दान प्यार दे आज्ञान से उबार दे
छोड़ कमलासन एक बार तू धरा पे आ
आजा वीणा वाली माँ विनती है तार दे
1
शब्द वर्ण में जगा राष्ट्र प्रेम वंदना
शुध्द हो माँ वर्तनी  स्वर को निखार दे
साधना को शाक्ति से हमें दिव्य दृष्टि  व जन जन में जगा  के प्यार
प्रीत की फुहार दे
2
प्रशस्ति पत्र में कहीं उलझ मैं जाऊँ माँ
कर्म पथ के रास्ते मेरे तु बुहार दे
ममता भरा तु सबको दुलार कर
आन वान शान हमे शाक्ति का भंडार दे
3
भक्त को माँ भक्ति से सृष्टि को वृष्टि से
सोई हुई चेतना को फिर से संवार दे
भावों की माँ हंस ग्रीव नाव पतवार से
डूबते जहान को अलम्ब व आधार दे
4

तेरे दर से माँ कभी खाली कोई जाये नही
झोली में विद्या बुद्धि यश को तु डार दे
जो हमारी बेटियों के अस्मिता के है लुटेरे
ऐसे पापियों के शीश धड़ से उतार दे
5
विनती लता की ललनाओं को प्यार व नारियों को माँ सम्मान का वरदान दे

मंजुलता जैन

No comments:

Post a Comment