आपको पसंद आयें न आये,
यह अलग चीज है,
मेरी रचनाएँ मुझको अजीज हैं,
अपनी अपनी भाषा अपनी तहजीब है,आपको पसंद आये न आये ये अलग चीज है,
मन के भावों की सरिता कभी
काल्पनिक कभी सजीव है,
यह अलग चीज है,
मेरी रचनाएँ मुझको अजीज हैं,
अपनी अपनी भाषा अपनी तहजीब है,आपको पसंद आये न आये ये अलग चीज है,
मन के भावों की सरिता कभी
काल्पनिक कभी सजीव है,
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