शब्द कुसुम
Thursday, May 17, 2018
आत्मविभोर
सुवह सुहानी भोर मे मै होकर आत्म विभोर
वंदन करूं मै उस रव का जिसने सबकी पकड़ी पौर
जिसकी महिमा का ओर छोर
नही है ओर न छोर नही है उस पर जोर
वंदन नमन अभिनंदन का पर उसका है दौर
साथियो उसका ही है दौर
नमस्कार साथियों
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