Thursday, May 17, 2018

गोकुल का भुनसारा

उठ भुनसारे जगावे तोरी  मैया,                                            
भोर भयो सूरज चढ आयो,लल्ला खोलो किवरियां,
नंदबाबा का प्यारो लाला माखन मिश्री को खवैया ,
उठ भुनसारे जगावे तोरी मैया,
ग्वाल वाल सब द्वारे ठाड़े, संग मे दाऊ भैया,
उठ भुनसारे जगावे उनकी मैया
गैया वछड़ा बंधे रम्हा रय, संग सुरै गैया,
उठ भुनसारे जगावे तोरी मैया
वंशी की धुन हमें सुनाजा, लेजा ताजा दहिया,
उठ भुनसारे जगावे तोरी मैया
सुमिर सुमिर तेरो यश गाऊं, पार लगादै नैया
उठ भुनसारे जगावे तोरी मैया
सादर सुप्रभात मित्रो 🙏
    "  दामिनी"🙏

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