तू हूरिस्तान की हूर हैं,
तू किसी नजर का नूर है
नूरुन्निशा कहूँ तुझे,
तू मेरी नज़र का नूर है,
स्नेह और प्रेम भरपूर है,
हर बुराई से दूर है ,
कुछ कर गुजरने का सुदूर है,
पर मंजिल अभी दूर है,
कभी संध्या सी नीरवता,
कभी उषा सी चंचलता,
दामिनी की सहेली है,
पर एक अंजान पहेली है,
🙏🙏🙏
तू किसी नजर का नूर है
नूरुन्निशा कहूँ तुझे,
तू मेरी नज़र का नूर है,
स्नेह और प्रेम भरपूर है,
हर बुराई से दूर है ,
कुछ कर गुजरने का सुदूर है,
पर मंजिल अभी दूर है,
कभी संध्या सी नीरवता,
कभी उषा सी चंचलता,
दामिनी की सहेली है,
पर एक अंजान पहेली है,
🙏🙏🙏
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