Wednesday, May 23, 2018

महारास

चांद से चांदनी ,चांदनी से चांद है,
चांद बादलो मे अटखेलि करता रहा,
चांदनी ने ओढी तारों की चुनर,
चांदनी बन गई चांद की अनुगामिनी ,
 वो  लहरा के आंचल चलती रही,
सारे समा को ये नजारा लुभाता रहा,
देख सुहाना समय आ गए सावरे,
तान वंशी की यू वो  सुनाने लगे,
सुन वंशी की धुन सखी आ गईं,
कान्हा राधे ही राधे बुलाने लगे,
राधा आने की खुशी में झूमा सारा समा,
खग वृंद मधुवन महकने लगे,
देखते देखते भावों की सरिता वही
हर तरफ कृष्ण राधे राधे हुए,                              
 देखमहरास को दामिनी ठगी रह गई,
खुली आंखो मे झांकी सजाने लगी,
भक्ति के रस पगी राधिका,
राधे रानी की पीर सुहानी लगी,



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